Antarvasana-hindi-kahani [Simple]

सवेरे के चार बजे थे। शहर अभी सो रहा था, लेकिन मीरा की आँखें खुल चुकी थीं। बगल में पति आलोक गहरी नींद में था। मीरा ने धीरे से करवट बदली और खिड़की से बाहर देखा। अंधेरा पिघल रहा था, जैसे कोई धीरे-धीरे परदा हटा रहा हो।

अंत में वह कैनवस छुपा तो देती है, पर इस बार वह जानती है कि उसकी वासना मरती नहीं — वह ज़िंदा है। और यही ज्ञान उसे एक नई ताकत देता है। antarvasana-hindi-kahani

कहानी की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मीरा रात के सन्नाटे में अपनी वासना को जीती है। रात — वह समय जब दुनिया सोती है, तब इंसान अपने असली रूप में जी सकता है। वह ब्रश उठाती है, कैनवस पर रंग भरती है, और उसके हाथ काँपते हैं — क्योंकि वह अपने अस्तित्व के सबसे गहरे हिस्से को छू रही होती है। कैनवस पर रंग भरती है

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